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SAGAR POLICE ACTION: 15 साल बाद ‘सलीम’ बनकर पुलिस ने बिछाया जाल; जयपुर में ‘मदनलाल’ बना बैठा था हत्यारा राशिद, ₹30,000 का इनामी गिरफ्तार

सागर पुलिस ने फिल्मी पटकथा जैसी कार्रवाई करते हुए 15 साल से फरार एक शातिर हत्यारे को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार ...

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| सतना टाइम्स

सागर पुलिस ने फिल्मी पटकथा जैसी कार्रवाई करते हुए 15 साल से फरार एक शातिर हत्यारे को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी अब्दुल राशिद, जो सागर जेल से फरार होने के बाद अपनी पहचान बदलकर ‘मदनलाल’ बन गया था, उसे पकड़ने के लिए पुलिस को ‘सलीम’ और ‘मजदूर’ का भेष धरना पड़ा। सागर की गोपालगंज थाना पुलिस ने डेढ़ दशक पुराने मामले का पटाक्षेप करते हुए साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे होते हैं।

2011 से फरार था ‘इनामी’ अपराधी

  • वारदात: अब्दुल राशिद पर हत्या का गंभीर मामला दर्ज था। साल 2011 में जब वह जेल में बंद था, तब इलाज के दौरान पुलिस को चकमा देकर अस्पताल से फरार हो गया था।

  • इनाम: पिछले 15 सालों से पुलिस उसकी तलाश में थी और उस पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

हुलिया बदला, नाम बदला: बन गया ‘मदनलाल’

फरार होने के बाद राशिद जयपुर पहुँचा और वहाँ की भीड़ में खुद को गुम कर लिया:

  • नई पहचान: उसने अपना नाम बदलकर ‘मदनलाल’ रख लिया।

  • स्थानीय वेशभूषा: उसने अपना पहनावा और बोलचाल पूरी तरह राजस्थानी रंग में ढाल ली थी, जिससे किसी को शक न हो। वह वहाँ एक आम दुकानदार/मजदूर के रूप में जीवन जी रहा था।

‘मजदूर’ बनकर पुलिस ने 5 दिन की रैकी

सागर पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से इनपुट मिला कि राशिद जयपुर में छिपा है। उप निरीक्षक नीरज जैन के नेतृत्व में टीम जयपुर पहुँची:

  • भेष बदला: अपराधी को शक न हो, इसलिए पुलिस टीम के सदस्य ‘सलीम’ और आम मजदूर बनकर इलाके में घूमे।

  • रैकी: लगातार 4-5 दिनों तक स्थानीय वेशभूषा में रहकर उसकी दुकान और घर की निगरानी की गई।

  • घेराबंदी: जब हुलिया पुराने रिकॉर्ड से मैच हुआ, तो टीम ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

“गलत आदमी को पकड़ रहे हो”

पकड़े जाने पर राशिद ने आखिरी समय तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की:

  • उसने पुलिस पर चिल्लाते हुए कहा, “मेरा नाम मदन है, आप गलत आदमी को पकड़ रहे हैं।”

  • हालांकि, जब पुलिस ने सड़कों पर ही उसका फिजिकल वेरिफिकेशन (पुराने निशानों के आधार पर) किया और कड़ी पूछताछ की, तो वह टूट गया और अपना असली नाम कबूल कर लिया।

सलाखों के पीछे पहुँचा आरोपी

सागर पुलिस आरोपी राशिद को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर से सागर लाई। उसे गोपालगंज थाने में कागजी कार्रवाई के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे दोबारा जेल भेज दिया गया है।

ऑपरेशन का सारांश 

विवरण जानकारी
आरोपी अब्दुल राशिद (पिता अब्दुल वाहिद)
फर्जी नाम मदनलाल (जयपुर में)
फरारी का समय 15 साल (2011 से)
पुलिस की रणनीति मजदूर और सलीम बनकर 5 दिन रैकी की।
इनाम राशि ₹30,000

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें